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मामादेव

  • वर्षा के देवता।
  • मामादेव का कोई मंदिर नहीं होता न ही कोई मूर्ति होती है।
  • गाँव के बाहर लकड़ी के तोरण के रूप में मामादेव पूजे जाते हैं।
  • इन्हें प्रसन्न करने के लिए “भैंस की कुर्बानी” दी जाती है। इनका प्रमुख मन्दिर स्यालोदड़ा (सीकर) में स्थित है। जहाँ प्रतिवर्ष रामनवमी को मेला भरता है।
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