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नाडोल के चौहान का इतिहास Nadol ke chouhan ka itihas

नाडोल के चौहान का इतिहास नाडोल के चौहान का इतिहास Nadol ke chouhan ka itihas शाकंभरी के चौहान शासक वाक्पतिराज के पुत्र लक्ष्मण चौहान ने 960 ई. के आसपास चावड़ा राजपूतों के आधिपत्य को समाप्त कर नाडोल में चौहान वंश की स्थापना की। शाकंभरी से निकलने वाली यह चौहानों की सबसे प्राचीन शाखा थी। लक्ष्मण […]

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रणथम्भौर के चौहान का इतिहास History of Ranthambhour

रणथम्भौर के चौहान का इतिहास History of Ranthambhour 13 वीं शताब्दी में यहाँ पर चौहान वंश का शासन था। पृथ्वीराज तृतीय के पुत्र गोविन्द राज ने यहाँ पर तराइन के द्वितीय युद्ध के पश्चात चौहान वंश की स्थापना की। यहाँ के शासक वीरनारायण ने दिल्ली सुल्तान इल्तुतमिश के रणथम्भौर पर हुए आक्रमण को विफल कर

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अजमेर के चौहान

अजमेर के चौहान चौहानों का प्रारम्भिक राज्य नाडोल (पाली) था। पृथ्वीराज रासो में चौहानों को ‘अग्निकुण्ड’ से उत्पन्न बताया गया। पं. गौरीशंकर हीराचंद ओझा चौहानों को सूर्यवंशी मानते हैं। पृथ्वीराज विजय एवं हम्मीर महाकाव्य ग्रन्थ में भी इन्हें सूर्यवंशी माना है। कर्नल टॉड ने चौहानों को विदेशी (मध्य एशियाई) माना है। डॉ. दशरथ शर्मा बिजोलिया

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आमेर का कच्छवाह वंश History of aamer

आमेर का कच्छवाह वंश ‘कच्छवाह‘ अपने आपको भगवान श्री राम के पुत्र ‘कुश‘ की संतान मानते हैं। संस्थापक – दुलहराय (तेजकरण), मूलतः ग्वालियर निवासी था। 1137 ई. में उसने बड़गुजरों को हराकर नवीन ढूँढाड़ राज्य की स्थापना की। दुलहराय के वंशज कोकिलदेव ने 1207 ई. में मीणाओं से आमेर जीतकर अपनी राजधानी बनाया, जो 1727

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