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महाराणा जयसिंह (1680 – 1698 ई.) || Maharana Jai singh

महाराणा जयसिंह (1680 – 1698 ई.) Maharana Jai singh –  महाराणा जयसिंह के समय 24 जून, 1681 में दूसरी मेवाड़-मुगल (शाहजादा मुअज्जम) संधि हुई। –  जयसिंह ने 1687 ई. में गोमती, झामरी, रूपारेल तथा बागर नदियों के पानी को रोककर जयसमन्द झील/ढेबर झील (सलूम्बर) का निर्माण करवाया। यह झील 1691 ई. में बनकर तैयार हुई। यह राजस्थान की मीठे पानी की सबसे बड़ी कृत्रिम झील […]

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महाराणा राज सिंह (1652 -1680 ई.) || Maharana Raj Singh

महाराणा राज सिंह (1652 -1680 ई.) Maharana Raj Singh –  महाराणा राज सिंह का राज्याभिषेक 10 अक्टूबर, 1652 को हुआ था। –  राजस्थान में राज सिंह अकेला ऐसा शासक था, जिसने अपने राज्याभिषेक के अवसर पर तुलादान करवाया था। इसने ब्राह्मणों को ‘रत्नों का तुलादान’ किया। इसने ‘विजय कटकातु’ की उपाधि धारण की। –  राज सिंह ने शासक बनते ही चित्तौडगढ़ के किले की मरम्मत करवाने का निश्चय किया। –  राज सिंह को ‘हाइड्रोलिक रूलर’ की उपाधि दी गई थी। इन्होंने गोमती नदी के पानी को रोककर राजसमुद्र/राजसमंद झील का निर्माण (1662-1676

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जगत सिंह प्रथम (1628 – 1652 ई.) || Jagat singh Pratham

जगत सिंह प्रथम (1628 – 1652 ई.) Jagat singh Pratham –  शाहजहाँ ने जगत सिंह प्रथम के समय प्रतापगढ़ व शाहपुरा रियासत को मेवाड़ से पृथक कर दिया था। –  जगत सिंह प्रथम ने जगमंदिर का निर्माण पूर्ण करवाया। –  जगत सिंह प्रथम ने उदयपुर में जगदीश मंदिर/जगन्नाथ राय मंदिर का निर्माण करवाया। इस मन्दिर को सपने में बना मन्दिर कहा जाता है। अर्जुन, भाणा तथा मुकुंद इसके वास्तुकार थे। इसी मंदिर में ‘जगन्नाथराय प्रशस्ति’ उत्कीर्ण है, जिसके रचयिता

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राणा कर्ण सिंह (1620 – 1628 ई.) || Rana Karn Singh

राणा कर्ण सिंह (1620 – 1628 ई.) Rana Karn Singh –  कर्ण सिंह ने पिछोला झील में जगमंदिर का निर्माण प्रारंभ करवाया, जहाँ 1623 ई. में शाहजहाँ को शरण दी गई थी। शाहजहाँ ने यहाँ ‘गफुर बाबा की मजार’ बनवाई। –  कर्ण सिंह मुगलों के आंतरिक मामलों में रुचि लेने वाला मेवाड़ का प्रथम शासक था। –  कर्ण सिंह ने उदयपुर में दिलखुश महल व कर्ण विलास का निर्माण करवाया।

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राणा अमर सिंह प्रथम || Rana Amar singh

राणा अमर सिंह प्रथम (1597 – 1620 ई.) Rana Amar singh –  अमर सिंह, महाराणा प्रताप व रानी अजबदे पंवार का पुत्र था। –  अकबर ने 1599 ई. में जहाँगीर के नेतृत्व में सेना भेजी, जिसे मेवाड़ की सेना ने उटाला नामक स्थान पर पराजित किया। –  जहाँगीर के शासक बनते ही 1605 ई. में परवेज, आसिफ खाँ, जफर बेग एवं सगर के नेतृत्व में मेवाड़ को अधीन करने का प्रयास किया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। –  1608 ई. में जहाँगीर ने महावत खाँ को मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए भेजा, लेकिन वह भी असफल रहा। –  1609 ई. में अब्दुल्ला, 1612 ई. में राजा बासू और 1613 ई. में मिर्जा अजीज कोका को मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए भेजा गया था, लेकिन यहाँ भी सफलता नहीं मिली। –  1613 ई. में जहाँगीर स्वयं अजमेर आया तथा अपने पुत्र खुर्रम (शाहजहाँ)

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महाराणा प्रताप || Maharana Pratap

महाराणा प्रताप (1572 – 1597 ई.) Maharana Pratap –  राणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 को (ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया) बादल महल (कटारगढ़), कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ। इनके बचपन का नाम ‘कीका’ था। –  राजमहल की क्रांति–मेवाड़ के सामन्तों ने उदय सिंह द्वारा नियुक्त उत्तराधिकारी जगमाल को हटाकर राणा प्रताप को शासक बनाया। यह घटना राजमहल की क्रांति कहलाती है। –  राज्याभिषेक – अखेराज सोनगरा ने जगमाल को गद्दी से हटाकर प्रताप को शासक बनाया। राज्याभिषेक महादेव बावड़ी (गोगुन्दा) में हुआ एवं सलूम्बर के सामंत कृष्णदास ने राणा प्रताप की कमर में तलवार बांधी। विधिवत राज्याभिषेक कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ, जिसमें मारवाड़ का राव चन्द्रसेन भी सम्मिलित हुआ। –  अकबर द्वारा महाराणा प्रताप से संधि करने हेतु 4 संधि प्रस्तावक/शिष्ट मण्डल भेजे गए। जलाल खाँ कोरची – नवम्बर, 1572 मिर्जा राजा मान सिंह – जून, 1573 भगवन्त दास – सितम्बर, 1573 टोडरमल – दिसम्बर, 1573 (प्रताप

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महाराणा उदय सिंह || Maharana Udai Singh

महाराणा उदय सिंह (1537 – 1572 ई.) Maharana Udai Singh –  यह महाराणा सांगा व रानी कर्णावती का ज्येष्ठ पुत्र था। –  उदय सिंह मावली के युद्ध (1540 ई.) में बनवीर को पराजित कर राजा बना था। –  उदय सिंह ने 1543 ई. में अफगान शासक शेरशाह सूरी को चितौड़ दुर्ग की चाबियाँ सौंपकर उसका प्रभुत्व स्वीकार कर लिया। शेरशाह ने अपना राजनीतिक प्रभाव बनाए रखने के लिए खवास खाँ को चितौड़ में रखा। –  अफगानों की अधीनता स्वीकार करने वाला मेवाड़ का पहला शासक उदय सिंह था। –  1557 ई. में रंगराय वैश्या के कारण उदय सिंह व अजमेर के हाकीम हाजी खाँ के मध्य ‘हरमाड़ा का युद्ध’ हुआ। –  1559 ई. में राणा उदय सिंह ने उदयपुर नगर बसाया व ‘उदयसागर झील’ का निर्माण करवाया। –  अकबर ने 1567 ई. में चित्तौड़ अभियान शुरू किया, क्योंकि उदय सिंह ने मालवा के बाज बहादुर व मेड़ता के जयमल को शरण दी थी।

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बनवीर || Banveer

बनवीर (1536 – 1540 ई.) Banveer –  बनवीर ने विक्रमादित्य की हत्या कर सिंहासन प्राप्त किया और चित्तौड़ पर अधिकार कर लिया। –  बनवीर ने चित्तौड़ में ‘नौलखा महल’ और तुलजा भवानी का मंदिर बनवाया। –  राव मालदेव की सहायता से उदय सिंह ने चित्तौड़ पर अधिकार किया।

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महाराणा विक्रमादित्य || Maharana Vikramaditya

महाराणा विक्रमादित्य (1528 – 1536 ई.) Maharana Vikramaditya –  यह महाराणा सांगा की हाड़ी रानी कर्णावती का पुत्र था। कर्णावती विक्रमादित्य की संरक्षिका थी। – विक्रमादित्य के समय मालवा और गुजरात के मुस्लिम शासक बहादुर शाह प्रथम ने चित्तौड़ पर 2 बार (1533 ई. तथा 1534 ई. में) आक्रमण किया। – 1534 ई. के दूसरे आक्रमण से पूर्व कर्णावती ने हुमायूँ को सहायता प्राप्त करने हेतु राखी भेजी थी परंतु हुमायूँ ने समय पर सहायता नहीं की। अतः बहादुर शाह के लंबे घेरे के बाद 1535 ई. में चित्तौड़ का पतन हुआ। इस समय चित्तौड़गढ़ का ‘दूसरा साका’ हुआ, जिसमें जौहर का नेतृत्व कर्णावती ने तथा केसरिया का नेतृत्व  देवलिया (प्रतापगढ़) के बाघसिंह ने किया। – विक्रमादित्य ने मीराबाई को दो बार मारने का असफल प्रयास किया। मीरा वृंदावन चली गई तथा ‘रविदास’ को इसने अपना गुरु बनाया। – विक्रमादित्य की हत्या (1536 ई.) में दासी पुत्र बनवीर ने की थी। यह कुंवर पृथ्वीराज की दासी ’पुतल दे’ का पुत्र था। – बनवीर ने उदय सिंह को भी मारने का प्रयास किया परंतु पन्नाधाय ने अपने पुत्र चंदन की बलि देकर उदय सिंह की रक्षा की। कीरत बारी (पत्तल उठाने वाला) की सहायता से उदय सिंह को कुम्भलगढ़ दुर्ग में पहुँचाया गया। इस समय कुम्भलगढ़ दुर्ग का किलेदार ‘आशा देवपुरा’ था।

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महाराणा रतन सिंह || Maharana Ratan Singh

महाराणा रतन सिंह (1528 – 1531 ई.) Maharana Ratan Singh – यह महाराणा सांगा की रानी धनबाई का पुत्र था। यह सांगा की मृत्यु के बाद मेवाड़ का राजा बना। –  बूंदी के सूरजमल हाड़ा के साथ ‘अहेरिया उत्सव’ के दौरान युद्ध करते हुए इसकी मृत्यु हो गई।

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