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बालाथल सभ्यता – उदयपुर || Balathal Sabhyata

बालाथल सभ्यता – उदयपुर Balathal Sabhyata उदयपुर जिले में बालाथल गाँव के पास बनास या बेड़च नदी के निकट एक टीले के उत्खनन से यहाँ ताम्र-पाषाणकालीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इस सभ्यता की खोज वर्ष 1962-63 में डॉ. वी. एन. मिश्र द्वारा की गई। डॉ. वी. एस. शिंदे, आर. के. मोहन्ते, डॉ. देव […]

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बैराठ सभ्यता – जयपुर || Bairath sabhyata

बैराठ सभ्यता – जयपुर Bairath sabhyata बैराठ जयपुर जिले में शाहपुरा उपखण्ड में बाणगंगा नदी के किनारे स्थित लौहयुगीन स्थल है। बैराठ का प्राचीन नाम ‘विराटनगर’ था। महाजनपद काल में यह मत्स्य जनपद की राजधानी था। यहाँ पर उत्खनन कार्य वर्ष 1936-37 में दयाराम साहनी द्वारा तथा वर्ष 1962-63 में नीलरत्न बनर्जी तथा कैलाशनाथ दीक्षित

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गिलूण्ड सभ्यता – राजसमंद || Gilund sabhyata

गिलूण्ड सभ्यता – राजसमंद Gilund sabhyata यह ताम्रयुगीन सभ्यता राजसमन्द जिले में बनास नदी के तट पर स्थित है। ‘मोडिया मगरी’ नामक टीले का संबंध गिलूण्ड सभ्यता से है। वर्ष 1957-58 में बी. बी. लाल द्वारा यहाँ पर उत्खनन कार्य करवाया गया। यहां सांस्कृतिक स्तर पर लगभग एक हजार वर्ष ईसा पूर्व के स्लेटी रंग

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गणेश्वर सभ्यता – सीकर || Ganeshwar sabhyata

गणेश्वर सभ्यता – सीकर Ganeshwar sabhyata सीकर जिले में नीम का थाना स्थान से कुछ दूरी पर स्थित गणेश्वर से उत्खनन में ताम्रयुगीन उपकरण प्राप्त हुए हैं। यह स्थान कांतली नदी के किनारे स्थित है। गणेश्वर को पूर्व हड़प्पा कालीन सभ्यता माना जाता है। डी.पी. अग्रवाल ने रेडियोकार्बन विधि एवं तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर

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कालीबंगा सभ्यता || Kalibanga Sabhyata

कालीबंगा सभ्यता Kalibanga Sabhyata कालीबंगा एक नगरीय सभ्यता थी। कालीबंगा कांस्ययुगीन सभ्यता मानी जाती है। कालीबंगा सभ्यता का समय 2350 ई.पू. से 1750 ई.पू. माना जाता है। (कार्बन डेटिंग पद्धति के अनुसार) कालीबंगा प्राचीन सरस्वती (वर्तमान में घग्घर) नदी के बाएँ तट पर हनुमानगढ़ जिले में है। नोट :-  सरस्वती नदी का सर्वप्रथम उल्लेख ऋग्वेद

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आहड़ सभ्यता – उदयपुर || Aahad Sanhyata Udaipur

आहड़ सभ्यता – उदयपुर Aahad Sanhyata आहड़ नामक ताम्रयुगीन सभ्यता उदयपुर में आयड़ या बेचड़ नदी के किनारे स्थित है। आहड़ सभ्यता का विकास बनास नदी घाटी में माना जाता है। दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी में इसे आघाटपुर या आघट दुर्ग के नाम से जाना जाता था। इसे ताम्रवती नगरी भी कहा जाता था। इसका एक अन्य

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प्रतापगढ़ का गुहिल वंश || Pratapgargh ka guhil vansh

प्रतापगढ़ का गुहिल वंश –  प्रतापगढ़ में गुहिल वंश का प्रारम्भ महाराणा मोकल के द्वितीय पुत्र क्षेम सिंह से प्रारम्भ हुआ। –  प्रतापगढ़ के शासक महारावत कहलाए। ये सूर्यवंशी राजा थे। –  क्षेम सिंह ने 1437 ई. में सादड़ी पर अधिकार किया था। –  क्षेम सिंह मालवा की सेना के साथ मेवाड़ के विरुद्ध लड़ा था । –  बाघ सिंह ने चित्तौड़ पर मालवा के सुल्तान बहादुरशाह के आक्रमण के समय चितौड़गढ़ दुर्ग की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। –  विक्रम सिंह ने देवलिया को अपनी राजधानी बनाया। –  महारावत हरि सिंह ने 1633 ई. में शाहजहाँ के समय मुगलों की अधीनता स्वीकार कर ली। –  महारावत रघुनाथ सिंह को ब्रिटिश सरकार ने ‘नाइट

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बांसवाड़ा का गुहिल वंश || Banswada ka guhil vansh

 बांसवाड़ा का गुहिल वंश –  वागड़ के शासक उदय सिंह ने अपने राज्य को दो भागों में बाँटा था। –  माही नदी के पूर्व का भाग बांसवाड़ा कहलाया और जगमाल यहाँ का प्रथम शासक बना। –  महारावल जगमाल ने लगभग 1530 ई. में बांसवाड़ा में गुहिल वंश की नींव रखी। –  महारावल जगमाल ने बांसवाड़ा में भीलेश्वर महादेव मन्दिर व फूल महल का निर्माण करवाया। –  महारावल जगमाल की पत्नी लाछकुंवरी ने तेजपुर गाँव में ‘बाई का तालाब’ निर्मित करवाया। –  11 वीं शताब्दी में यहाँ परमारों का शासन था, जिसकी राजधानी आर्थुणा थी। –  प्रताप सिंह ने 1576 ई. में मुगल शासक अकबर की अधीनता स्वीकार की। डूंगरपुर के आसकरण ने भी अकबर की अधीनता स्वीकार की थी। – 

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वागड़ में गुहिल राजवंश || Vagad me Guhil Rajvansh

वागड़ में गुहिल राजवंश –  राजस्थान का दक्षिणी भाग, जिसमें बांसवाड़ा, डूंगरपुर व प्रतापगढ़ का कुछ भाग शामिल है, वागड़ क्षेत्र कहलाता है। –  जालोर के चौहान शासक कीर्तिपाल से पराजित होकर मेवाड़ के शासक सामंत सिंह ने वागड़ क्षेत्र (1178 ई.) में गुहिल वंश की नींव रखी। –  सामंत सिंह ने वद्रपटक (बड़ौदा) को अपनी राजधानी बनाया था। –  गुजरात के सोलंकी वंश के शासक भीमदेव द्वितीय ने सामंत सिंह को पराजित कर वागड़ क्षेत्र, गुहिल वंशीय विजयपाल को दे दिया। –  तेरहवीं शताब्दी के प्रारम्भ में सामंत सिंह के वंशज जयन्त सिंह ने वागड़ पर पुन: अधिकार कर लिया। –  देवपाल के उत्तराधिकारी वीर सिंह ने डूँगरिया भील को पराजित कर डूंगरपुर की स्थापना की एवं इसे अपनी राजधानी बनाया। प्रताप सिंह (1398 – 1424 ई.) – –  यह पाता रावल के नाम से विख्यात था। –  प्रताप सिंह ने पोतला तालाब व पोतला द्वार का निर्माण करवाया था। –  प्रताप सिंह ने प्रतापपुर नगर बसाया था। गोपीनाथ (1424 – 1447 ई.)

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राणा भूपाल / भोपालसिंह (1930 -1947 ई.) || Rana Bhupal Singh

राणा भूपाल / भोपालसिंह (1930 -1947 ई.) Rana Bhupal Singh –  भूपाल सिंह, सिसोदिया वंश का अंतिम शासक था। –  इनके समय राजस्थान का एकीकरण हुआ था। –  इनके समय में बिजोलिया, बेंगू किसान आन्दोलन तथा प्रजामण्डल आन्दोलन हुआ। –  18 अप्रैल, 1948 को उदयपुर रियासत का विलय संयुक्त राजस्थान में हो गया। –  राजस्थान के ये एकमात्र शासक थे, जो आजीवन ‘महाराज प्रमुख’ पद पर रहे। –  ये स्वतंत्रता के समय मेवाड़ के शासक थे।

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