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शिक्षा मनोविज्ञान || Psychology ||

मनोविज्ञान (Psychology):- ‘साइकोलॉजी’ शब्द की उत्पत्ति यूनानी (ग्रीक) भाषा के दो शब्दों से हुई है-साइकी (Psyche), जिसका अर्थ है- आत्मा (Soul) और लोगस (Logos) जिसका अर्थ है- अध्ययन (Study)। इस प्रकार साइकोलॉजी (मनोविज्ञान) का अर्थ है- आत्मा का अध्ययन/विज्ञान (Study of the Soul)● एबिंगहास:- ‘मनोविज्ञान का वर्तमान स्वरूप नया है परन्तु इसका इतिहास बहुत पुराना है।‘● अरस्तू (384 ई.पू. […]

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नोह सभ्यता – भरतपुर || Noh Sabhyata

नोह सभ्यता – भरतपुर Noh Sabhyata वर्ष 1963-64 में रतनचंद्र अग्रवाल के निर्देशन में यहाँ पर उत्खनन कार्य किया गया। रेडियो कार्बन तिथि के अनुसार इस सभ्यता का समय 1100 ई.पू. से 900 ई.पू. माना जाता है। यहाँ से उत्खनन में विशालकाय यक्ष प्रतिमा तथा मौर्यकालीन पॉलिश युक्त चुनार के चिकने पत्थर से टुकड़े प्राप्त

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ईसवाल सभ्यता – उदयपुर || Iswal Sabhyata

ईसवाल सभ्यता – उदयपुर Iswal Sabhyata लौह युगीन सभ्यता। प्राचीन औद्योगिक बस्ती। इस स्थल का उत्खनन कार्य राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर के पुरातत्त्व विभाग के निर्देशन में किया गया। यहाँ से निरन्तर लौहा गलाने के प्रमाण प्राप्त हुए हैं। यहाँ से प्राक् ऐतिहासिक काल से मध्यकाल तक का प्रतिनिधित्व करने वाली मानव बस्ती के प्रमाण पाँच

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जोधपुरा सभ्यता – जयपुर || Jodhpura Sabhyata

जोधपुरा सभ्यता – जयपुर Jodhpura Sabhyata जोधपुरा नामक पुरातात्त्विक स्थल जयपुर जिले की कोटपुतली तहसील में साबी नदी के किनारे स्थित है। यह एक लौहयुगीन प्राचीन सभ्यता स्थल है। यहाँ पर उत्खनन कार्य वर्ष 1972-73 में आर.सी. अग्रवाल तथा विजय कुमार के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। जोधपुरा से ताम्रयुगीन सभ्यता के प्रतीक कपिषवर्णी मृद्भांडो का

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ओझियाना सभ्यता – भीलवाड़ा || Ojhiana Sabhyata

ओझियाना सभ्यता – भीलवाड़ा Ojhiana Sabhyata भीलवाड़ा के बदनोर के पास खारी नदी के तट पर स्थित यह स्थल ताम्रयुगीन आहड़ संस्कृति से संबंधित है। इस स्थल का उत्खनन बी. आर. मीणा तथा आलोक त्रिपाणी द्वारा वर्ष 1999-2000 में किया गया। यह पुरातात्त्विक स्थल पहाड़ी पर स्थित था जबकि आहड़ संस्कृति से जुड़े अन्य स्थल

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सुनारी सभ्यता – झुंझुनूं Sunari Sabhyata

सुनारी सभ्यता – झुंझुनूं Sunari Sabhyata सुनारी नामक पुरातात्त्विक स्थल झुंझुनूं की खेतड़ी तहसील में कांतली नदी के किनारे स्थित है। यहाँ पर उत्खनन कार्य वर्ष 1980-81 में राजस्थान राज्य पुरातत्त्व विभाग द्वारा करवाया गया। यहाँ से लौहा गलाने की प्राचीनतम भटि्टयाँ प्राप्त हुई है। यहाँ से स्लेटी रंग के मृद्भांड संस्कृति के अवशेष प्राप्त

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बागोर सभ्यता – भीलवाड़ा || Bagor Sabhyata

बागोर सभ्यता – भीलवाड़ा Bagor Sabhyata यह एक पाषाणकालीन सभ्यता स्थल है। यह स्थल भीलवाड़ा की मांडल तहसील में कोठारी नदी के तट पर स्थित है। यहाँ पर उत्खनन कार्य वर्ष 1967-68 में डॉ. विरेन्द्रनाथ मिश्र, डॉ. एल.एस. लेश्निक व डेक्कन कॉलेज पूना तथा राजस्थान पुरातत्त्व विभाग के सहयोग से किया गया। बागोर सभ्यता के

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रैढ़ सभ्यता – टोंक Raidhh Sabhyata

रैढ़ सभ्यता – टोंक Raidhh Sabhyata रैढ़ टोंक जिले की निवाई तहसील में ढील नदी के किनारे स्थित पुरातात्त्विक स्थल है। यह एक लौह युगीन सभ्यता है। यहाँ पर उत्खनन कार्य वर्ष 1938-39 में दयाराम साहनी के नेत्तृत्व में तथा अंतिम रूप में उत्खनन कार्य डॉ. केदारनाथ पूरी के द्वारा करवाया गया। उत्खनित क्षेत्र का

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रंगमहल सभ्यता – हनुमानगढ़ || Rangmahal Sabhyata

रंगमहल सभ्यता – हनुमानगढ़ Rangmahal Sabhyata रंगमहल हनुमानगढ़ जिले में सरस्वती (वर्तमान में घग्घर) नदी के पास स्थित है। यह एक ताम्रयुगीन सभ्यता है। यहाँ पर उत्खनन कार्य डॉ. हन्नारिड के निर्देशन में स्वीडिश दल द्वारा वर्ष 1952-54 ई. में किया गया। ये मृद्भांपड चाक से बने होते थे तथा ये पतले तथा चिकने होते

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नगरी सभ्यता – चित्तौड़गढ || Nagari Sabhyata

नगरी सभ्यता – चित्तौड़गढ Nagari Sabhyata नगरी नामक पुरातात्त्विक स्थल चितौड़गढ़ में बेड़च नदी के तट पर स्थित है जिसका प्राचीन नाम माध्यमिका मिलता है। यहाँ पर सर्वप्रथम उत्खनन कार्य वर्ष 1904 में डॉ. डी. आर. भण्डारकर द्वारा तथा तत्पश्चात वर्ष 1962-63 में केन्द्रीय पुरातत्त्व विभाग द्वारा करवाया गया। यहाँ से शिवि जनपद के सिक्के

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