जैत्र सिंह (1213 – 1250 ई.) || Jetra singh
– जैत्र सिंह ने मेवाड़ की प्रतिष्ठा पुन: स्थापित की थी। इसने परमारों को पराजित कर चित्तौड़गढ़ पर अधिकार किया तथा अपनी राजधानी चित्तौड़गढ़ को बनाया। इसके शासन काल को मेवाड़ के स्वर्णकाल के रूप में जाना जाता है।
– ‘भुताला के युद्ध’ (1227 ई.) में जैत्र सिंह ने इल्तुतमिश की सेना को पराजित किया, जिसका उल्लेख जयसिंह सूरी के ग्रंथ ‘हम्मीर मदमर्दन’ में मिलता है।
– ‘तारीख-ए-फरिश्ता’ में भी इल्तुतमिश के चित्तौड़ पर आक्रमण का जिक्र मिलता है।
– जैत्र सिंह ने 1248 ई. में नसीरुद्दीन महमूद को पराजित किया था।
– जैत्र सिंह के सेनापति बालक व मदन थे।
– चीरवा अभिलेख के अनुसार, जैत्र सिंह इतना शक्तिशाली था कि मालवा, गुजरात, मारवाड़ तथा दिल्ली के शासक भी उसे पराजित नहीं कर सके।
– जी. एच. ओझा ने जैत्र सिंह को ‘रण रसिक’ कहा तथा डॉ. दशरथ शर्मा ने इन्हें ‘मेवाड़ की नव शक्ति का संचारक’ की संज्ञा दी ।
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