Rajasthan ki sabhyata

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ओझियाना सभ्यता – भीलवाड़ा || Ojhiana Sabhyata

ओझियाना सभ्यता – भीलवाड़ा Ojhiana Sabhyata भीलवाड़ा के बदनोर के पास खारी नदी के तट पर स्थित यह स्थल ताम्रयुगीन आहड़ संस्कृति से संबंधित है। इस स्थल का उत्खनन बी. आर. मीणा तथा आलोक त्रिपाणी द्वारा वर्ष 1999-2000 में किया गया। यह पुरातात्त्विक स्थल पहाड़ी पर स्थित था जबकि आहड़ संस्कृति से जुड़े अन्य स्थल […]

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सुनारी सभ्यता – झुंझुनूं Sunari Sabhyata

सुनारी सभ्यता – झुंझुनूं Sunari Sabhyata सुनारी नामक पुरातात्त्विक स्थल झुंझुनूं की खेतड़ी तहसील में कांतली नदी के किनारे स्थित है। यहाँ पर उत्खनन कार्य वर्ष 1980-81 में राजस्थान राज्य पुरातत्त्व विभाग द्वारा करवाया गया। यहाँ से लौहा गलाने की प्राचीनतम भटि्टयाँ प्राप्त हुई है। यहाँ से स्लेटी रंग के मृद्भांड संस्कृति के अवशेष प्राप्त

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बागोर सभ्यता – भीलवाड़ा || Bagor Sabhyata

बागोर सभ्यता – भीलवाड़ा Bagor Sabhyata यह एक पाषाणकालीन सभ्यता स्थल है। यह स्थल भीलवाड़ा की मांडल तहसील में कोठारी नदी के तट पर स्थित है। यहाँ पर उत्खनन कार्य वर्ष 1967-68 में डॉ. विरेन्द्रनाथ मिश्र, डॉ. एल.एस. लेश्निक व डेक्कन कॉलेज पूना तथा राजस्थान पुरातत्त्व विभाग के सहयोग से किया गया। बागोर सभ्यता के

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रैढ़ सभ्यता – टोंक Raidhh Sabhyata

रैढ़ सभ्यता – टोंक Raidhh Sabhyata रैढ़ टोंक जिले की निवाई तहसील में ढील नदी के किनारे स्थित पुरातात्त्विक स्थल है। यह एक लौह युगीन सभ्यता है। यहाँ पर उत्खनन कार्य वर्ष 1938-39 में दयाराम साहनी के नेत्तृत्व में तथा अंतिम रूप में उत्खनन कार्य डॉ. केदारनाथ पूरी के द्वारा करवाया गया। उत्खनित क्षेत्र का

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रंगमहल सभ्यता – हनुमानगढ़ || Rangmahal Sabhyata

रंगमहल सभ्यता – हनुमानगढ़ Rangmahal Sabhyata रंगमहल हनुमानगढ़ जिले में सरस्वती (वर्तमान में घग्घर) नदी के पास स्थित है। यह एक ताम्रयुगीन सभ्यता है। यहाँ पर उत्खनन कार्य डॉ. हन्नारिड के निर्देशन में स्वीडिश दल द्वारा वर्ष 1952-54 ई. में किया गया। ये मृद्भांपड चाक से बने होते थे तथा ये पतले तथा चिकने होते

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नगरी सभ्यता – चित्तौड़गढ || Nagari Sabhyata

नगरी सभ्यता – चित्तौड़गढ Nagari Sabhyata नगरी नामक पुरातात्त्विक स्थल चितौड़गढ़ में बेड़च नदी के तट पर स्थित है जिसका प्राचीन नाम माध्यमिका मिलता है। यहाँ पर सर्वप्रथम उत्खनन कार्य वर्ष 1904 में डॉ. डी. आर. भण्डारकर द्वारा तथा तत्पश्चात वर्ष 1962-63 में केन्द्रीय पुरातत्त्व विभाग द्वारा करवाया गया। यहाँ से शिवि जनपद के सिक्के

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बालाथल सभ्यता – उदयपुर || Balathal Sabhyata

बालाथल सभ्यता – उदयपुर Balathal Sabhyata उदयपुर जिले में बालाथल गाँव के पास बनास या बेड़च नदी के निकट एक टीले के उत्खनन से यहाँ ताम्र-पाषाणकालीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुए हैं। इस सभ्यता की खोज वर्ष 1962-63 में डॉ. वी. एन. मिश्र द्वारा की गई। डॉ. वी. एस. शिंदे, आर. के. मोहन्ते, डॉ. देव

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बैराठ सभ्यता – जयपुर || Bairath sabhyata

बैराठ सभ्यता – जयपुर Bairath sabhyata बैराठ जयपुर जिले में शाहपुरा उपखण्ड में बाणगंगा नदी के किनारे स्थित लौहयुगीन स्थल है। बैराठ का प्राचीन नाम ‘विराटनगर’ था। महाजनपद काल में यह मत्स्य जनपद की राजधानी था। यहाँ पर उत्खनन कार्य वर्ष 1936-37 में दयाराम साहनी द्वारा तथा वर्ष 1962-63 में नीलरत्न बनर्जी तथा कैलाशनाथ दीक्षित

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गिलूण्ड सभ्यता – राजसमंद || Gilund sabhyata

गिलूण्ड सभ्यता – राजसमंद Gilund sabhyata यह ताम्रयुगीन सभ्यता राजसमन्द जिले में बनास नदी के तट पर स्थित है। ‘मोडिया मगरी’ नामक टीले का संबंध गिलूण्ड सभ्यता से है। वर्ष 1957-58 में बी. बी. लाल द्वारा यहाँ पर उत्खनन कार्य करवाया गया। यहां सांस्कृतिक स्तर पर लगभग एक हजार वर्ष ईसा पूर्व के स्लेटी रंग

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गणेश्वर सभ्यता – सीकर || Ganeshwar sabhyata

गणेश्वर सभ्यता – सीकर Ganeshwar sabhyata सीकर जिले में नीम का थाना स्थान से कुछ दूरी पर स्थित गणेश्वर से उत्खनन में ताम्रयुगीन उपकरण प्राप्त हुए हैं। यह स्थान कांतली नदी के किनारे स्थित है। गणेश्वर को पूर्व हड़प्पा कालीन सभ्यता माना जाता है। डी.पी. अग्रवाल ने रेडियोकार्बन विधि एवं तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर

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