बूँदी का तारागढ़ || Taara Garh
बूँदी का तारागढ़ “हड्डन करि विख्यात हुब, हड्डवती यह देस“ पाटव प्रजापति को, नाक नाकहू को छिति। मण्डल को छोगा, बूंदी नगर बखानिये।। बलहठ बंका देवड़ा, करतब बंका गौड़। हाड़ा बांका गाढ़ में, रणबंका राठौड़।। सागर फूटा जल बहा, अब क्या करे जतन्न। जाता घर जहांगीर का, राख्या राव रतन्न।।