History of Mewar

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महाराणा अरि सिंह द्वितीय (1761 – 73 ई.) || Maharana Ari Singh

महाराणा अरि सिंह द्वितीय (1761 – 73 ई.) Maharana Ari Singh –  इनके समय सरदारों ने राजमाता झाली से उत्पन्न पुत्र रतन सिंह को मेवाड़ का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। –  अरि सिंह ने सिंध और गुजरात से सैनिकों को बुलाकर अपनी सेना में भर्ती किया। –  बूंदी के शासक अजीत सिंह ने शिकार खेलते हुए 9 मार्च 1773 ई. को धोखे से अरि सिंह को मरवा दिया। –  महाराणा अरि सिंह का उत्तराधिकारी हम्मीर द्वितीय (1773-78 ई.) […]

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महाराणा जगत सिंह द्वितीय (1734 – 1751 ई.) || Maharana Jagat Singh Dvitiy

महाराणा जगत सिंह द्वितीय (1734 – 1751 ई.) Maharana Jagat Singh Dvitiy –  जगत सिंह द्वितीय के समय पेशवा बाजीराव प्रथम मेवाड़ आया था तथा उसने महाराणा के साथ चौथ वसूली का समझौता किया। –  महाराणा जगत सिंह द्वितीय ने माधो सिंह को जयपुर का शासन दिलाने के लिए जयपुर के उत्तराधिकार संघर्ष में हस्तक्षेप किया था। –  इन्होंने पिछोला झील में जगनिवास महलों का निर्माण करवाया। –  इनके दरबारी कवि नेकराम ने जगत विलास नामक ग्रंथ लिखा। –  इन्होंने 17 जुलाई, 1734 को मराठों को राजस्थान से बाहर निकालने के लिए भीलवाड़ा में आयोजित हुरड़ा सम्मेलन की अध्यक्षता की। यह सम्मेलन अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो सका। –  इनके समय अफगान शासक नादिरशाह ने 1739 ई. में दिल्ली पर आक्रमण किया। –  कर्नल

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महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय (1710 – 1734 ई.) Maharana Sangram Singh Dvitiy

महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय (1710 – 1734 ई.) Maharana Sangram Singh Dvitiy –  राजस्थान में पहली बार महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय के समय मेवाड़ में मराठों ने प्रवेश किया तथा मेवाड़ से चौथ कर प्राप्त किया। –  इन्होंने मराठों के विरुद्ध राजस्थान के सवाई जयसिंह के साथ मिलकर हुरड़ा सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई। लेकिन दुर्भाग्यवश इस सम्मेलन के आयोजित होने से पूर्व ही इनका

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महाराणा अमर सिंह द्वितीय (1698 – 1710 ई.) || Maharana Amar singh Dvitiy

महाराणा अमर सिंह द्वितीय (1698 – 1710 ई.) Maharana Amar singh Dvitiy –  अमर सिंह द्वितीय के शासनकाल में मेवाड़-मारवाड़-आमेर के मध्य 1708 ई. में देबारी समझौता हुआ। इस समझौते में मेवाड़ के अमर सिंह द्वितीय, मारवाड़ के अजीत सिंह तथा आमेर के सवाई जयसिंह ने भाग लिया। यह समझौता मुगल बादशाह बहादुरशाह प्रथम के विरुद्ध किया गया था। –  अमर सिंह द्वितीय ने अपनी पुत्री इन्द्रकुंवरी का विवाह जयपुर के महाराजा सवाई जयसिंह से करवाया। – 

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महाराणा जयसिंह (1680 – 1698 ई.) || Maharana Jai singh

महाराणा जयसिंह (1680 – 1698 ई.) Maharana Jai singh –  महाराणा जयसिंह के समय 24 जून, 1681 में दूसरी मेवाड़-मुगल (शाहजादा मुअज्जम) संधि हुई। –  जयसिंह ने 1687 ई. में गोमती, झामरी, रूपारेल तथा बागर नदियों के पानी को रोककर जयसमन्द झील/ढेबर झील (सलूम्बर) का निर्माण करवाया। यह झील 1691 ई. में बनकर तैयार हुई। यह राजस्थान की मीठे पानी की सबसे बड़ी कृत्रिम झील

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महाराणा राज सिंह (1652 -1680 ई.) || Maharana Raj Singh

महाराणा राज सिंह (1652 -1680 ई.) Maharana Raj Singh –  महाराणा राज सिंह का राज्याभिषेक 10 अक्टूबर, 1652 को हुआ था। –  राजस्थान में राज सिंह अकेला ऐसा शासक था, जिसने अपने राज्याभिषेक के अवसर पर तुलादान करवाया था। इसने ब्राह्मणों को ‘रत्नों का तुलादान’ किया। इसने ‘विजय कटकातु’ की उपाधि धारण की। –  राज सिंह ने शासक बनते ही चित्तौडगढ़ के किले की मरम्मत करवाने का निश्चय किया। –  राज सिंह को ‘हाइड्रोलिक रूलर’ की उपाधि दी गई थी। इन्होंने गोमती नदी के पानी को रोककर राजसमुद्र/राजसमंद झील का निर्माण (1662-1676

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जगत सिंह प्रथम (1628 – 1652 ई.) || Jagat singh Pratham

जगत सिंह प्रथम (1628 – 1652 ई.) Jagat singh Pratham –  शाहजहाँ ने जगत सिंह प्रथम के समय प्रतापगढ़ व शाहपुरा रियासत को मेवाड़ से पृथक कर दिया था। –  जगत सिंह प्रथम ने जगमंदिर का निर्माण पूर्ण करवाया। –  जगत सिंह प्रथम ने उदयपुर में जगदीश मंदिर/जगन्नाथ राय मंदिर का निर्माण करवाया। इस मन्दिर को सपने में बना मन्दिर कहा जाता है। अर्जुन, भाणा तथा मुकुंद इसके वास्तुकार थे। इसी मंदिर में ‘जगन्नाथराय प्रशस्ति’ उत्कीर्ण है, जिसके रचयिता

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राणा कर्ण सिंह (1620 – 1628 ई.) || Rana Karn Singh

राणा कर्ण सिंह (1620 – 1628 ई.) Rana Karn Singh –  कर्ण सिंह ने पिछोला झील में जगमंदिर का निर्माण प्रारंभ करवाया, जहाँ 1623 ई. में शाहजहाँ को शरण दी गई थी। शाहजहाँ ने यहाँ ‘गफुर बाबा की मजार’ बनवाई। –  कर्ण सिंह मुगलों के आंतरिक मामलों में रुचि लेने वाला मेवाड़ का प्रथम शासक था। –  कर्ण सिंह ने उदयपुर में दिलखुश महल व कर्ण विलास का निर्माण करवाया।

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राणा अमर सिंह प्रथम || Rana Amar singh

राणा अमर सिंह प्रथम (1597 – 1620 ई.) Rana Amar singh –  अमर सिंह, महाराणा प्रताप व रानी अजबदे पंवार का पुत्र था। –  अकबर ने 1599 ई. में जहाँगीर के नेतृत्व में सेना भेजी, जिसे मेवाड़ की सेना ने उटाला नामक स्थान पर पराजित किया। –  जहाँगीर के शासक बनते ही 1605 ई. में परवेज, आसिफ खाँ, जफर बेग एवं सगर के नेतृत्व में मेवाड़ को अधीन करने का प्रयास किया गया था, लेकिन सफलता नहीं मिली। –  1608 ई. में जहाँगीर ने महावत खाँ को मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए भेजा, लेकिन वह भी असफल रहा। –  1609 ई. में अब्दुल्ला, 1612 ई. में राजा बासू और 1613 ई. में मिर्जा अजीज कोका को मेवाड़ पर आक्रमण करने के लिए भेजा गया था, लेकिन यहाँ भी सफलता नहीं मिली। –  1613 ई. में जहाँगीर स्वयं अजमेर आया तथा अपने पुत्र खुर्रम (शाहजहाँ)

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महाराणा प्रताप || Maharana Pratap

महाराणा प्रताप (1572 – 1597 ई.) Maharana Pratap –  राणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 को (ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया) बादल महल (कटारगढ़), कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ। इनके बचपन का नाम ‘कीका’ था। –  राजमहल की क्रांति–मेवाड़ के सामन्तों ने उदय सिंह द्वारा नियुक्त उत्तराधिकारी जगमाल को हटाकर राणा प्रताप को शासक बनाया। यह घटना राजमहल की क्रांति कहलाती है। –  राज्याभिषेक – अखेराज सोनगरा ने जगमाल को गद्दी से हटाकर प्रताप को शासक बनाया। राज्याभिषेक महादेव बावड़ी (गोगुन्दा) में हुआ एवं सलूम्बर के सामंत कृष्णदास ने राणा प्रताप की कमर में तलवार बांधी। विधिवत राज्याभिषेक कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ, जिसमें मारवाड़ का राव चन्द्रसेन भी सम्मिलित हुआ। –  अकबर द्वारा महाराणा प्रताप से संधि करने हेतु 4 संधि प्रस्तावक/शिष्ट मण्डल भेजे गए। जलाल खाँ कोरची – नवम्बर, 1572 मिर्जा राजा मान सिंह – जून, 1573 भगवन्त दास – सितम्बर, 1573 टोडरमल – दिसम्बर, 1573 (प्रताप

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