शेरगढ़ दुर्ग (कोश वर्द्धन दुर्ग) बारां || Shergarh Fort
शेरगढ़ दुर्ग (कोश वर्द्धन दुर्ग ), बारां
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अचलगढ़ दुर्ग पृथ्वी पंवारा तणी अनै पृथ्वी तणे पंवार। एका आबू गढ़ बेसणो, दूजी उज्जेनी धार।।
बूँदी का तारागढ़ “हड्डन करि विख्यात हुब, हड्डवती यह देस“ पाटव प्रजापति को, नाक नाकहू को छिति। मण्डल को छोगा, बूंदी नगर बखानिये।। बलहठ बंका देवड़ा, करतब बंका गौड़। हाड़ा बांका गाढ़ में, रणबंका राठौड़।। सागर फूटा जल बहा, अब क्या करे जतन्न। जाता घर जहांगीर का, राख्या राव रतन्न।।
आम्बेर दुर्ग केते राव राजा मान पावें पातसाहन सो। पावे पातसाह मान-मान के घटाने सो।।
नागौर दुर्ग उण मुख ते गग्गो कह्यो, इण कर लई कटार। वार कह पायो नहीं, जमधर हो गई पार।। खाटू तो स्याले भलो, ऊनाले अजमेर। नागाणो नित ही भलो, सावण बीकानेर।।
जालौर दुर्ग आभ फटै, घर ऊलटै, कटै बगतराँ कोर। सीस पड़ै, धड़ तड़फड़े, जद छूटै जालौर।।
जूनागढ़ बीकानेर अभो ग्राह बीकाण गज, मारु समद अथाह गरुड़ छाँड़ गोविन्द ज्यूँ, सहाय करो जयशाह डाढ़ाली डोकर थई, का तूँ गई विदेस। खून बिना क्यों खोसजे, निज बीका रो देस।।
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