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जैत्र सिंह || Jetra singh

जैत्र सिंह (1213 – 1250 ई.) || Jetra singh –  जैत्र सिंह ने मेवाड़ की प्रतिष्ठा पुन: स्थापित की थी। इसने परमारों को पराजित कर चित्तौड़गढ़ पर अधिकार किया तथा अपनी राजधानी चित्तौड़गढ़ को बनाया। इसके शासन काल को मेवाड़ के स्वर्णकाल के रूप में जाना जाता है। –  ‘भुताला के युद्ध’ (1227 ई.) में जैत्र सिंह ने इल्तुतमिश की सेना को पराजित किया, जिसका उल्लेख जयसिंह सूरी के ग्रंथ ‘हम्मीर मदमर्दन’ में मिलता है। – ‘तारीख-ए-फरिश्ता’ में भी इल्तुतमिश के चित्तौड़ पर आक्रमण का जिक्र मिलता है। –  जैत्र सिंह ने 1248 ई. में नसीरुद्दीन महमूद को पराजित किया था। – जैत्र सिंह के सेनापति बालक व मदन थे। –  चीरवा अभिलेख के अनुसार, जैत्र सिंह इतना शक्तिशाली था कि मालवा, गुजरात, मारवाड़ तथा दिल्ली के शासक भी उसे पराजित नहीं कर सके। – जी. एच. […]

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रावल सामंत सिंह || Rawal samant singh

रावल सामंत सिंह (1172-1191 ई.) || Rawal samant singh –  सामंत सिंह का विवाह अजमेर के चौहान शासक पृथ्वीराज द्वितीय की बहन पृथ्वीबाई से हुआ। –  सामंत सिंह को जालोर के कीर्तिपाल चौहान ने पराजित कर मेवाड़ पर अधिकार किया था। –  सामंत सिंह ने ‘वागड़ क्षेत्र’ में (1178 ई.) गुहिल वंश की स्थापना की। इसने तराईन के द्वितीय युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की सहायता की थी। –  सामंत सिंह के भाई मथन सिंह ने कीर्तिपाल को पराजित कर मेवाड़ पर पुन: अधिकार कर लिया।

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कर्ण सिंह या रण सिंह || Karn singh / Ran singh

कर्ण सिंह या रण सिंह || Karn singh / Ran singh –  इसने आहोर के पर्वत पर किला बनवाया था। –  रणसिंह के 2 पुत्र थे- क्षेमकरण और राहप/माहप। – क्षेम सिंह ने ‘रावल शाखा’ और राहप ने ‘राणा शाखा’ को आरम्भ किया। – क्षेम सिंह के दो पुत्र हुए- कुमार सिंह और सामंत सिंह प्रथम।

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शक्ति कुमार || Shakti Kumar

शक्ति कुमार (977 – 993 ई.) || Shakti Kumar – इनके समय मालवा के परमार शासक मुंज ने आक्रमण किया और आहड़ को नष्ट कर दिया। अतः शक्ति कुमार ने नागदा को पुनः राजधानी बनाया। – परमार शासक भोज ने चित्तौड़ में ‘त्रिभुवन नारायण मंदिर’का निर्माण करवाया था।

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अल्लट || Allat ||

अल्लट (951 – 953 ई.) || Allat –  अल्लट को ख्यातों में ‘आलू रावल’ कहा गया है। – इसने ‘आहड़’ को दूसरी राजधानी बनाया और यहाँ पर ‘वराह मंदिर’ का निर्माण करवाया। –  इसे मेवाड़ में ‘नौकरशाही व्यवस्था का संस्थापक’ माना जाता है। –  अल्लट ने राष्ट्रकूटों को पराजित कर हूण राजकुमारी ‘हरिया देवी’ से विवाह किया था।

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बप्पा रावल || Bappa Rawal

बप्पा रावल (734 – 753 ई.) || Bappa Rawal –  गुहिल वंश के वास्तविक संस्थापक बप्पा रावल थे। –  इस वंश की कुल देवी बाणमाता थी तथा अन्नपूर्णा माता इनकी इष्ट देवी थी। –  इस वंश के राजध्वज पर उगता सूरज एवं धनुष-बाण अंकित था। –  कुंभलगढ़ प्रशस्ति (1460 ई.) में बप्पा रावल को ‘विप्र’ कहा गया है। – बप्पा रावल ने ‘हिन्दुआ सूरज’, ‘राजगुरु चक्कवै’ (चारों दिशाओं का विजेता) की उपाधि धारण की थी। गुहिल

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ब्यावर जिला

ब्यावर जिला घोषणा: 17 मार्च 2023 मंत्रिमंडल मंजुरी: 4 अगस्त 2023 स्थापना दिवस: 7 अगस्त 2023 रामलुभाया समिति– समिति की सिफारिश पर नए जिलों का गठन किया गया है। ब्यावर जिला – ब्यावर जिला, अजमेर जिले से अलग हुआ है। ब्यावर जिले का गठन अजमेर, पाली और भीलवाड़ा जिलों से किया गया है। नए जिले

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फलौदी जिला

फलौदी जिला घोषणा: 17 मार्च 2023 मंत्रिमंडल मंजुरी: 4 अगस्त 2023 स्थापना दिवस: 7 अगस्त 2023 रामलुभाया समिति– समिति की सिफारिश पर नए जिलों का गठन किया गया है। फलौदी जिला – फलौदी जिले को जोधपुर जिले से अलग करके बनाया गया है। फलौदी जिले का निर्माण 8 तहसीलों को मिलाकर किया गया है। फलौदी जिले

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केकड़ी जिला

केकड़ी जिले का भौगोलिक-प्रशासनिक ढांचा   घोषणा: 17 मार्च 2023 मंत्रिमंडल मंजुरी: 4 अगस्त 2023 स्थापना दिवस: 7 अगस्त 2023 रामलुभाया समिति– समिति की सिफारिश पर नए जिलों का गठन किया गया है। केकड़ी जिला – केकड़ी जिले को अजमेर व टोंक जिले से अलग करके बनाया गया है। केकड़ी जिले का निर्माण 6 तहसीलों को

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