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| अंगारों पर पैर रखना – संकट में पड़ जाना। |
| घोड़े बेच कर सोना – काम से उदासीन रहकर निश्चित होकर समय बिताना। |
| छठी का दूध याद आना – सम्पूर्ण शक्ति लगाने पर सफलता में संदेह होना। |
| चुल्लू भर पानी में डूब जाना – लज्जा और ग्लानि का तीव्र अनुभव करना। |
| अपना उल्लू सीधा करना – स्वार्थ सिद्ध करना। |
| खून खौल उठना – अत्यधिक क्रोध आना। |
| बाल बाँका न होना – कुछ भी अनिष्ट न होना। |
| हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाना – निष्क्रिय बन जाना। |
| लोहे के चने चबाना – कठिनाई में पड़ जाना। |
| नकेल हाथ में होना – सभी तरह का अधिकार होना। |
| रौंगटे खड़े होना – डर जाना। |
| मुट्ठी गरम करना – रिश्वत देना। |
| आटे-दाल का भाव मालूम होना – जीवन जीने का अनुभव होना। |
| कलेजा मुँह को आना – घबरा जाना या शोक का चरम सीमा पर होना। |
| आकाश के तारे तोड़ना – असंभव कार्य को भी संभव बना देना। |
| अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना – स्वयं अपना अहित करना। |
| अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना – अपनी बड़ाई स्वयं करना। |
| खाक में मिलाना – नष्ट कर देना। |
| टेक निभाना – वादा पूरा करना। |
| पहाड़ टूटना – भयंकर आपत्ति आ जाना। |
| भूत सवार होना – सनक बैठ जाना, हठ पकड़ लेना। |
| दाल में काला होना – कुछ संदेह की बात होना। |
| छाती पर मूँग दलना – पास रहकर कष्ट पहुँचाना। |
| हाथ मलना – पछताना। |
| आसमान सिर पर उठाना – बहुत शोर-गुल करना। |
| राई का पहाड़ बनाना – थोड़ी-सी बात को बढा-चढ़ाकर कहना। |
| आस्तीन का साँप होना – धोखेबाज या विश्वासघाती होना। |
| एड़ी-चोटी का जोर लगाना – पूरी शक्ति लगा देना। |
| ऊँगली पर नाचना – इशारे पर चलना। |
| कमर कसना – तैयार होना। |
| काया पलट होना – सर्वथा बदल जाना। |
| कानों कान खबर न होना-किसी को कुछ भी ज्ञात न होना। |
| किस खेत की मूली-नगण्य व्यक्ति। |
| किसी का घर जला कर अपना हाथ सेंकना-अपने छोटे से स्वार्थ के लिए दूसरों को हानि पहुँचाना। |
| दूसरे के कंधे पर रखकर बंदूक चलाना-दूसरे को माध्यम बनाकर कोई काम करना। |
| कुत्ते की नींद सोना- हल्की नींद लेना। |
| कुत्ते की मौत मरना-बुरी दशा में प्राणान्त होना। |
| कोल्हू का बैल-परिश्रम करते हुए निरंतर पिसते रहना। |
| थोथा चना बाजे घना-अल्पज्ञ का बढ़-बढ़ कर बात करना। |
| खूँटे के बल कूदना-किसी अन्य व्यक्ति की सहायता पर अभिमान करना। |
| पाँवों में बेड़ी पड़ जाना-विवाह हो जाना या बंधन में बंध जाना। |
| बाल बाँका न होना-किंचित् भी हानि न होना। |
| उँगली पकड़ कर पौंचा पकड़ना-धीरे-धीरे अधिकार कर लेना। |
| एक और ग्यारह होना-मेल करके शक्ति प्राप्त कर लेना। |
| कान कतरना-अत्यधिक चतुर होना। |
| गढ़े मुर्दे उखाड़ना-पिछली बातों को याद करना। |
| गुड़ गोबर करना-सब किये-कराये को नष्ट या बर्बाद कर देना। |
| गुदड़ी का लाल-छिपी हुई अमूल्य वस्तु। |
| घी के दिये जलाना-बहुत खुशियाँ मनाना। |
| चिकना घड़ा-प्रभावहीन व्यक्तित्व। |
| धरती पर पाँव न पड़ना-फूला न समाना या अधिक हर्षित होना। |
| पेट पर लात मारना-आजीविका के साधन से अलग कर देना। |
| पापड़ बेलना-विषम परिस्थितियों से गुजरना। |
| बे-पेंदी का लौआ होना-स्थिर विचारों का न होना। |
| बहती गंगा में हाथ धोना-सुअवसर पाकर लाभांवित होना। |
| भली थाली में लात मारना-जीविकोपार्जन के साधन को पाकर भी ठुकरा देना। |
| भंग की तरंग में रहना-मदहोशी में रहना। |
| मुँह में राम बगल में छुरी-मुँह से मीठी बातें करना और हृदय में कपट रखना। |
| रंग में भंग होना-प्रसन्नता के समय अचानक विघ्न उपस्थिति हो जाना। |
| रंगा सियार-धोखेबाज व्यक्ति। |
| लाल-पीला होना-गुस्सा होना। |
| लोहे के चने चबाना-मुसीबतों से संघर्ष करना। |
| लोहे को लोहा काटता है-बुराई को बुराई से ही दूर किया जा सकता है। |
| लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं-दुष्ट व्यक्ति सीधे समझाने से नहीं मानता है। |
| भेड़ की खाल में भेड़िया होना – देखने में सरल पर वास्तव में खतरनाक। |
| भैंस के आगे बीन बजाना-मूर्ख के समक्ष बुद्धिमान की बातें करना। |
| मियाँ की जूती मियाँ की चाँद-किसी मनुष्य की वस्तु से उसी को हानि पहुँचाना। |
| सर-आँखों पर बिठाना-बहुत आदर सत्कार करना। |
| सिर मुँडाते ही ओले पड़ना-कार्यारम्भ में ही विघ्न पड़ जाना। |
| साँप के मुँह में उँगली देना-जान-बूझकर मुसीबत मोल ले लेना। |
| सोने की चिड़िया-धनवान व्यक्ति होना। |
| हिरन हो जाना-दूर हो जाना या भाग जाना। |
| हाथ का मैल-तुच्छ वस्तु होना। |
| हाथ धोकर पीछे पड़ना-कार्य में तत्परता दिखलाना। |
| शोले भड़काना-अशांति फैलाना। |
| लुटिया डुबो देना-काम बिगाड़ देना या अपयश का काम करना। |
| हवा के घोड़े पर सवार होना-बहुत जल्दी में होना या जल्दबाजी करना। |
| हवा का रुख देखना-समय की गति पहचान कर काम करना। |
| हाथों के तोते उड़ जाना-भौंचक्का रह जाना। |
| नाक पर सुपारी तोड़ना-बहुत तंग करना। |
| अपनी करनी पार उतरनी-कर्म़ों का फल प्राप्त करना। |
| न घर का न घाट का-किसी तरफ का न होना। |
| घुटने टेकना-समर्पण करना। |
| लोहा लेना-सामना करना। |
| अंगूठा दिखा देना-इनकार करना। |
| लोहा मानना – बहादुरी स्वीकार करना। |
| मिट्टी में मिल जाना – बर्बाद होना। |
| नाक रगड़ना – खुशामद करना। |
| अंग-अंग ढीले हो जाना – अत्यधिक थक जाना। |
| अढ़ाई चावल की खिचड़ी पकाना – अपनी राय अलग रखना। |
| अक्ल पर पत्थर पड़ना – कुछ भी समझ में न आना। |
| शबरी के बैर – तुच्छ भेंट या प्रेमपूर्वक दी गई तुच्छ भेंट। |
| अंगारे बरसाना – क्रोध से भरपूर होना। |
| आँखों में धूल झौंकना – धोखा देना। |
| आँखें बिछाना – सत्कार करना। |
| आँख उठाना – साहस करना। |
| आँख में चर्बी छाना – मदान्ध होना। |
| आँचल में बात बाँधना – किसी बात को अच्छी तरह स्मरण रखना। |
| आँसू पी जाना – भीतर ही भीतर रोना और दुःख प्रकट करना। |
| आकाश-पाताल एक करना – अत्यधिक प्रयास करना। |
| आग की तरह फैल जाना – तेजी से फैलना। |
| आग में घी डालना – किसी के आवेश को और बढ़ाना। |
| आकाश का फूल होना – अप्राप्य वस्तु होना। |
| आँख फूटी पीर गई – विपत्ति या शौक के कारण का दूर होना। |
| आठ वार नौ त्यौहार – सदैव आनन्द मंगल होना। |
| अरण्य रोदन – व्यर्थ प्रयत्न करना। |
| आँख का काजल चुराना – गुप्त भावों को जान लेना। |
| आँखों से गिरना – अपमानित व लांछित होना। |
| आठ-आठ आँसू गिराना – पश्चाताप करना। |
| आस्तीन का साँप होना – कपटी मित्र। |
| ईद का चाँद होना – दुर्लभ होना। |
| ईट से ईट बजाना – बर्बाद कर देना। |
| उल्टे छुरे से मूँडना – धोखे से काम निकालना। |
| उड़ती चिड़िया पहचान लेना – मनोगत भावों को जान लेना। |
| ऊँगली उठाना – आपेक्ष करना। |
| एक लाठी से सभी को हाँकना – अज्ञान भरा व्यवहार करना। |
| एक अनार सौ बीमार – वस्तु की पूर्ति कम और माँग अधिक होना। |
| एक म्यान में दो तलवार – एक ही स्थान पर दो समान अधिकारी नहीं रह सकते। |
| कंगाली में आटा गीला होना – मुसीबत पर मुसीबत पड़ना। |
| कंधा डाल देना – अस्त्र छोड़ देना या हार मान लेना। |
| कठपुतली की तरह नाचना – किसी से अपनी इच्छानुसार काम कराना। |
| कफन सिर से बाँधना – मरने के लिए तैयार रहना। |
| कब्र का मुँह झाँक आना – मरते मरते बच जाना। |
| कब्र में पाँव लटकना – मौत के करीब होना। |
| कमान से तीर निकल जाना – हानि हो चुकने पर बोध होना। |
| कलम तोड़ना – अद्भुत और हृदयस्पर्शी। |
| कलेजा छलनी कर देना – ताने मारना या व्यंग्य बाण छोड़ना। |
| कलेजा थाम कर रह जाना – असह्य वेदना चुपचाप सह लेना। |
| कलेजा निकाल कर रख देना – अत्यन्त प्रिय वस्तु का अर्पण कर देना। |
| कलेजा पत्थर का करना – भारी दुख सहने के लिए चित्त को दबाना। |
| कलेजे का टुकड़ा – प्रिय या आत्मीय (पुत्र)। |
| कलेले के टुकड़े होना – शोक से हृदय विदीर्ण होना। |
| कागज की नाव होना – क्षणभंगुर; |
| कागजी घोड़े दौड़ाना – अकारण ही लम्बी-चौड़ी लिखा-पढ़ी करना। |
| कान पर जूँ न रेंगना – किंचित् भी परवाह न करना। |
| खाक छानना – दर-दर भटकना। |
| खेत रहना – मारा जाना। |
| घुटने टेक देना – हार स्वीकार करना। |
| छप्पर फाड़कर देना – अचानक लाभ होना। |
| जमीन पर पैर न रखना – घमण्ड करना। |
| अंक/लगाना – गले लगाना, आलिंगन करना |
| अंग-अंग खिल उठना – प्रसन्न हो जाना |
| अंग-अंग फूले न समाना – बहुत आनंदित होना |
| अंग लगना – ताकत देना |
| अंगारों पर पैर रखना – जोखिम मोल लेना |
| अँगूठा दिखाना – समय पर इन्कार कर देना |
| अँगूठे पर मारना – परवाह न करना |
| अंजर-पंजर ढीला होना – अंग-अंग ढीला होना |
| अंडा फूट जाना – भेद खुल जाना |
| अंत बिगाड़ना – परिणाम खराब कर लेना |
| अँतड़ियाँ कुलबुलाना – बहुत भूख लगना |
| अंदर होना – जेल में बंद होना |
| अंधा बनाना – मूर्ख बनाकर धोखा देना |
| अंधे की लकड़ी/लाठी – एकमात्र सहारा |
| अंधेर नगरी – जहाँ धाँधली हो |
| अँधेरे घर का उजाला – इकलौता बेटा |
| अंधों में काना राजा – अयोग्य व्यक्तियों के बीच कम योग्य भी बहुत योग्य होता है |
| अक्ल के पीछे लट्ठ लिये फिरना – मूर्खता का काम करना |
| अगर-मगर करना – बहाना करना |
| अड़ियल टट्टू – हठी, जिद्दी |
| अड्डे पर चहकना – अपने घर पर रोब दिखाना |
| अढ़ाई चावल की खिचड़ी अलग पकाना – सब से अलग सोच-विचार रखना |
| अन्न जल उठ जाना – किसी जगह से चले जाना |
| अपना उल्लू सीधा करना – अपना मतलब निकालना |
| अपनी खाल में मस्त रहना – अपनी दशा से संतुष्ट रहना |
| अपने पाँव पर आप कुल्हाड़ी मारना – अपना अहित करना |
| अपने पैरों पर खड़ा होना – स्वावलंबी होना |
| अपने मुँह मियाँ मिट्ठु बनना – अपनी बड़ाई आप ही करना |
| अबे-तबे करना – आदर से न बोलना |
| आँख उठाकर न देखना – तिरस्कार करना |
| आँख का काँटा – शत्रु |
| आँख का काजल – अत्यंत प्रिय |
| आँख मारना – इशारा करना |
| आँख लगना – झपकी आना |
| आँखें चार होना – आमने-सामने होना |
| आँखें फेर लेना – प्रतिकूल होना |
| आँखों का काजल चुराना – गहरी चोरी कर लेना |
| आँखों का पानी ढलना – निर्लज्ज होना |
| आँखों पर चर्बी चढ़ना – अहंकार से ध्यान तक न देना |
| आँखों में गड़ जाना – पाने की इच्छा होना |
| आँखों में सरसों फूलना – विवेक न होना |
| आँच न आने देना – ज़रा सा भी कष्ट न होने देना |
| आँचल पसारना – याचना करना |
| आँधी के आम – सस्ती चीजें |
| आकाश कुसुम – अनहोनी बात |
| आकाश पाताल एक करना – कोई उपाय छोड़ न रखना |
| आग पर पानी डालना – झगड़ा मिटाना |
| आग बबूला होना – बहुत गुस्सा होना |
| आग लगने पर कुआँ खोदना – पहले से कोई उपाय न कर रखना |
| आगे का पैर पीछे पड़ना – किस्मत उलटी होना |
| आटे के साथ घुन पिसना – दोषी के साथ निर्दोष की भी हानि होना |
| आठ-आठ आँसू रोना – बहुत पछताना |
| आधा तीतर आधा बटेर – बेमेल काम |
| आवाज उठाना – विरोध प्रकट करना |
| आसमान के तारे तोड़ना – असंभव काम करना |
| आसमान पर चढ़ा देना – बहुत तारीफ़ करना |
| आसमान सिर पर उठाना – बहुत हो-हल्ला मचाना |
| आस्तीन का साँप – विश्वासघाती मित्र |
| इशारों पर नाचना – किसी की इच्छाओं का तुरंत पालन करना |
| ईंट का जवाब पत्थर से देना – किसी के आरोप का करारा जवाब देना |
| ईद का चाँद होना – बहुत दिनों बाद दिखाई देना |
| उँगली पकड़ते पहुँचा पकड़ना – ज़रा सा सहारा मिलते ही कुछ और पाने की लालसा करना |
| उड़ती चिड़िया पहचानना – मन की बात ताड़ जाना |
| उधेड़-बुन में पड़ना/रहना – सोच-विचार करते रहना |
| उबल पड़ना – एकदम गुस्सा हो जाना |
| उल्टी गंगा बहाना – उलटा काम करना |
| उलटे छुरे से मूँड़ना – मूर्ख बनाकर ठग लेना |
| ऊँट का सुई की नोक से निकलना – असंभव होना |
| एक घाट पानी पीना – एकता और सहनशीलता होना |
| एक ही थैली के चट्टे-बट्टे – एक जैसे चरित्र और विचार के लोग |
| एड़ी-चोटी का पसीना एक करना – घोर परिश्रम करना |
| ओढ़नी बदलना – पक्की सहेलियाँ बनना |
| कंधे से कंधा छिलना – भारी भीड़ होना |
| कच्चा चिट्ठा खोलना – सब भेद खोल देना |
| कच्ची गोली खेलना – अनुभवहीन होना |
| कढ़ी का सा उबाल – मामूली जोश |
| कन्नी काटना – कतरा कर निकल जाना |
| कलम तोड़ना – बढ़िया लिखना |
| कलेजा ठंडा होना – मन को शांति मिलना |
| कलेजा का टुकड़ा – बहुत प्यारा बेटा |
| कहा-सुनी होनी – झगड़ा होना |
| काँटे बिछाना – अड़चनें पैदा करना |
| काँटों पर घसीटना – संकट में डालना |
| कागजी घोड़े दौड़ाना – केवल लिखा-पढ़ी करते रहना |
| काजल की कोठरी – कलंक लगने का स्थान |
| काठ मार जाना – हतप्रभ हो जाना |
| कान गरम करना – पीटना |
| कान पर जूँ तक न रेंगना – कुछ भी परवाह न करना |
| कान में डाल देना – सुना देना |
| कान में तेल डाले बैठना – सुनकर भी ध्यान न देना |
| काफूर होना – गायब हो जाना |
| काल कवलित होना या काल के गाल में जाना – मर जाना |
| काला मुँह करना – बुरा करना |
| किताबी कीड़ा होना – केवल पढ़ने में लगे रहना |
| कीचड़ उछालना – निंदा करना |
| कुछ उठा न रखना – कोई कसर न छोड़ना |
| कुत्ते की मौत मरना – बुरी तरह से मरना |
| कोई दम भर का मेहमान होना – मरने के करीब होना |
| कोढ़ में खाज होना – दुःख पर और दुःख होना |
| कौड़ी-कौड़ी पर जान देना – कंजूस होना |
| खिचड़ी पकाना – अंदर-अंदर षड्यंत्र करना |
| खून का घूँट पीना – गुस्सा पचा जाना |
| खून खौलना/उबलना – जोश आना |
| खून सफ़ेद हो जाना – दया न रह जाना |
| गंगा नहाना – कठिन कार्य पूरा होना |
| गढ़ जीतना – बहुत कठिन काम करना |
| गले पड़ा ढोल बजाना – सिर पर पड़ी ज़िम्मेदारी को मजबूरन पूरा करना |
| गहरा हाथ मारना – बहुत कुछ हथिया लेना |
| गागर में सागर भरना – थोड़े में बहुत कुछ कहना |
| गाजर मूली समझना – तुच्छ समझना |
| गाल फुलाना – रूठना |
| गिरगिट की तरह रंग बदलना – एक रंग-ढंग न रखना |
| गुड़ गोबर कर देना – बना-बनाया काम बिगाड़ देना |
| गुल खिलाना – कोई बखेड़ा खड़ा करना |
| गूँगे का गुड़ होना – अनुभव को प्रकट न कर पाता |
| गूलर का फूल – दुर्लभ वस्तु |
| गोबर गणेश – बिलकुल बुद्धू |
| घड़ियाँ गिनना – बेचैनी से प्रतीक्षा करना |
| घर फूँक तमाशा देखना – अपनी हानि करके मौज उड़ाना |
| घर में गंगा बहना – अच्छी चीज पास ही में मिल जाना |
| घाव पर नमक छिड़कना – दुःखी को और दुःखी करना |
| घाव हरा करना – भूले हुए दुःख की याद दिलाना |
| घी के दिये जलना – आनंद मंगल होना |
| घोंघा बसंत – मूर्ख |
| चंडाल चौकड़ी – निकम्मे बदमाश लोग |
| चंडूखाने की गप मारना – पागलों की सी झूठी-मूठी बातें |
| चचा बनाकर छोड़ना – खूब मरम्मत करना |
| चाँद खुजलाना – पिटने को जी करना |
| चाँद पर थूकना – किसी अच्छे आदमी पर कलंक लगाना |
| चाँदी का जूता – घूस का धन |
| चार चाँद लगना – बहुत शोभा होना |
| चार दिन की चाँदनी – थोड़े दिनों का सुख |
| चिराग तले अँधेरा होना – अपने पास का वातावरण ठीक न होना |
| चींटी के पर निकलना – नष्ट होने के करीब होना |
| चुल्लू भर पानी में डूब मरना – शर्म के मारे मुँह न दिखाना |
| चूना लगाना – धोखा देना |
| चोटी का पसीना एड़ी तक आना – कड़ा परिश्रम करना |
| चौदहवीं का चाँद – बहुत सुंदर |
| छठी का दूध याद आना – संकट में पिछले सुख की याद आना |
| छाती छलनी हो जाना – लगातार दुःख आते रहना |
| छाती पर मूँग/कोदों दलना – बहुत नष्ट देना |
| छाती पर साँप लोटना – ईर्ष्या होना |
| जंगल में मंगल होना – उजाड़ में चहल-पहल होना |
| ज़मीन आसमान एक करना – सब उपाय कर डालना |
| जमीन पर पैर न रखना – अकड़कर चलना |
| जमीन में गड़ना – लज्जा से सिर नीचा होना |
| ज़हर की पुड़िया – झगड़ालू औरत |
| जहाज़ का कौआ/पंछी – जिसका कोई और ठिकाना नहीं |
| जान हथेली पर रखना – प्राणों की परवाह न करना |
| जी का जंजाल – व्यर्थ का झंझट |
| जी खट्टा होना – विरति होना |
| जीती मक्खी निगलना – जानते हुए भी अशोभन कार्य करना |
| जूतियों में दाल बाँटना – लड़ाई झगड़ा हो जाना |
| टका-सा मुँह लेकर रह जाना – लज्जित हो जाना |
| टट्टी की आड़ में शिकार खेलना – छिपे-छिपे किसी के विरुद्ध कुछ करना |
| टाँग तले से निकालना – हार मनवाना |
| टेढ़ी उँगली से घी निकालना – चालाकी से मतलब निकालना |
| ठन ठन गोपाल – खोखला |
| डकार जाना – माल पचा जाना |
| डेढ़ चावल की खिचड़ी पकाना – बहुमत से अलग रहना |
| डोरे डालना – प्रेम में फँसाना |
| ढाई दिन की बादशाहत – थोड़े दिन की मौज बहार |
| ढिंढोरा पीटना – सब को बताना |
| तलवा खुजलाना – यात्रा करने को होना |
| तार-तार होना – पूरी तरह फट जाना |
| तालू से जीभ न लगना – बोलते रहना |
| तूती बोलना – रोब जमना |
| तेली का बैल होना – हर समय काम में लगे रहना |
| थूक कर चाटना – वचन से फिरना |
| दमड़ी के लिए चमड़ी उधेड़ना – मामूली सी बात के लिए भारी दंड देना |
| दाँत तालू में जमना – बुरे दिन आ जाना |
| दाई से पेट छिपाना – जानकार से बात छिपाना |
| दिन को तारे दिखाई देना – अजीब हालत होना |
| दिन दूनी रात चौगुनी होना – बहुत जल्दी-जल्दी होना |
| दिल के फफीले तोड़ना – कुढ़कर जली कटी बातें कहना |
| दिल मसोसकर रह जाना – मन में खीझकर रह जाना |
| दूज का चाँद होना – बहुत दिनों बाद दिखाई देना |
| दूध का दूध और पानी का पानी करना – उचित निर्णय करना |
| देवता कूच कर जाना – घबरा जाना |
| दो नावों पर पैर रखना – दोनों तरफ रहना |
| धूप में बाल सफ़ेद करना – अनुभवहीन होना |
| नमक मिर्च लगाना – बढ़ा-चढ़ाकर कहना |
| नाक कटना – बदनामी होना |
| नाक का बाल होना – बहुत प्यारा होना |
| नाक भौं चढ़ाना – घृणा या असंतोष प्रकट करना |
| नाक में नकेल डालना – वश में करना |
| नाच नचाना – मनचाही करवाना |
| नाव में धूल उड़ाना – व्यर्थ बदनाम करना |
| नीला-पीला होना – गुस्से होना |
| पंजर पंजर ढीला होना – देखिए अंग अंग ढीला होना |
| पटरी बैठना – मन मिलना, अच्छे संबंध होना |
| पत्थर की लकीर होना – बात पक्का होना |
| पर न मारना – पहुँच न सकता |
| पलक पाँवड़े बिछाना – आदर से स्वागत करना |
| पसीना पसीना होना – बहुत थक जाना |
| पहाड़ टूट पड़ना – भारी विपत्ति आ जाना |
| पहाड़ से टक्कर लेना – बहुत भारी आदमी से मुकाबला करना |
| पाँव उखड़ना – हार कर भाग जाना |
| पानी का बुलबुला होना – क्षणभंगुर होना |