WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now

राजस्थान की बहूद्देशीय परियोजना || Rajasthan ki bahuddeshiy pariyojana

FacebookX

Rajasthan ki bahuddeshiy pariyojana

राजस्थान की बहूद्देशीय परियोजना

A. भाखड़ा नांगल बाँध परियोजना 

  • भाखड़ा नांगल बाँध परियोजना भारत की नदी घाटी परियोजनाओं के अंतर्गत सबसे बड़ी परियोजना है।
  • यह बहुउद्देश्यीय परियोजना राजस्थान, पंजाब व हरियाणा की संयुक्त परियोजना है।
  • इसमें हिमाचल प्रदेश का हिस्सा केवल जल-विद्युत उत्पादन तक सीमित है।
  • 1909 में सर्वप्रथम पंजाब के तत्कालीन गवर्नर “लुईस डेने’ ने इस परियोजना को सतलज नदी पर बाँध बनाने के विचार के रूप में प्रकट किया।
  • इस परियोजना के निर्माण का कार्य स्वतंत्रता के पश्चात् मार्च, 1948 में प्रारम्भ हुआ।
  • इस परियोजना में राजस्थान का हिस्सा 15.22% है।
  • इस परियोजना के अंतर्गत भाँखड़ा बाँध, नांगल बाँध, नांगल हाइडल चैनल पर गंगवाल व कोटला के दो विद्युत गृह, 1104 किमी. लम्बाई की मुख्य नहर और 3360 किमी. लम्बाई की फतेहाबाद शाखा नहरों के निर्माण कार्य शामिल हैं।
  • इस बहुउद्देश्यीय परियोजना के अंतर्गत सतलज नदी पर भाखड़ा व नांगल स्थानों पर दो बाँध बनाये गए हैं, जिनका विवरण निम्नानुसार है –

1. भाखड़ा बाँध – 

  • यह भारत का सबसे ऊँचा बाँध है।
  • यह बाँध सतलज नदी पर  होशियारपुर जिले में भाखड़ा स्थान पर स्थित है।
  • इसकी लम्बाई 518 मी. है, जबकि ऊँचाई 226 मी. है।
  • इस बाँध के जलाशय का अन्य नाम ‘गोविंद सागर है, जिसकी क्षमता 1 करोड़ क्यूबिक मीटर है, जो कि 96 किमी. लम्बा है।
  • यह एक कंकरीट से निर्मित व गुरुत्व की दृष्टि से सीधा बाँध है।
  • इसकी आधारशिला नवम्बर, 1955 में तत्कालीन प्रधानमंत्री “पंडित जवाहरलाल नेहरू’ ने रखी थी।
  • इसका निर्माण कार्य अमेरिकी बाँध निर्माता विशेषज्ञ ‘हॉर्वे स्लोकेम के निर्देशन में 1962 में पूर्ण हुआ।
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अक्टूबर, 1963 को इसे राष्ट्र को समर्पित किया।
  • नेहरू ने इसे ‘पुनरुत्थित भारत का नवीन मंदिर कहा था तथा इसके बारे में कहा कि यह एक ऐसी चमत्कारी वस्तु है, जिसे देखकर व्यक्ति रोमांचित हो उठता है।
भाखड़ा बाँध से सम्बन्धित प्रमुख आँकड़े
स्थितिलम्बाईचौड़ाईऊँचाईनिर्माण
बिलासपुर, हि. प्रदेश518.16 मी. (1700 फीट)9.14 मी. (30 फीट)225.55 मी. (740 फीट)सतलज  नदी पर

2. नाँगल बाँध – 

  • भाखड़ा बाँध से 12 किमी. दूर स्थित नाँगल नामक स्थान पर इस बाँध का निर्माण कार्य 1952 में सम्पूर्ण हुआ।
नाँगल बाँध से सम्बन्धित प्रमुख आँकड़े
स्थितिलम्बाईचौड़ाईऊँचाईनिर्माण
नाँगल (रोपड़), पंजाब340मी.2900मी.सतलज नदी पर
  • नाँगल बाँध से निकाली गई नाँगल हाइडल चैनल पर दो विद्युत गृह स्थापित किये गए हैं।
  • ये जल-विद्युत उत्पादन व जलापूर्ति में सहायक है।
READ MORE about  राजस्थान में वन्यजीव अभ्यारण्य || Rajasthan me vany jeev abhyaranya

नाँगल बाँध से निकाली गई प्रमुख नहरें 

1.  भाखड़ा नहर – 

  • यह नहर नाँगल बाँध से निकाली गई है, जो हरियाणा, पंजाब व राजस्थान में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करवाती है। 
  • इस नहर का निर्माण कार्य 1954 में पूर्ण हुआ तथा इससे राजस्थान में जलापूर्ति भी इसी समय शुरू हुई।
  • राजस्थान व पंजाब सरकार के मध्य 1959 में हुए भाखड़ा-नाँगल समझौते के तहत् 15.22% हिस्से की विद्युत व जल आपूर्ति राजस्थान को प्राप्त होती है।
  • इस परियोजना से राज्य में सर्वाधिक सिंचाई हनुमानगढ़ जिले में होती है।
  • इस परियोजना से लाभान्वित राज्य के अन्य प्रमुख जिले हैं – गंगानगर, चुरु, सीकर, झुँझुनूँ व बीकानेर।

2. बिस्त दोआब नहर – 

  • यह नहर नाँगल बाँध से सतलज नदी पर निकाली गई है।
  • इस नहर द्वारा पंजाब को सिंचाई सुविधा प्राप्त होती है।

B. चम्बल नदी परियोजना

  • चम्बल नदी राजस्थान की सबसे बड़ी व बारहमासी नदी है।
  • इस नदी पर चम्बल नदी परियोजना की शुरुआत 1953-54 में राजस्थान व मध्यप्रदेश की 50-50% की साझेदारी के साथ की गई।
  • इस योजना का निर्माण कार्य 3 चरणों में पूरा हुआ – 

1.  प्रथम चरण – 

  • इसमें गाँधी सागर (मध्यप्रदेश) बाँध व कोटा बैराज बाँधों का निर्माण किया गया।
  • इस चरण के दौरान मध्यप्रदेश के मन्दसौर जिले में गाँधी सागर बाँध का निर्माण किया गया है।
  • कोटा बैराज बाँध का निर्माण कोटा में किया गया, जिसकी शुरुआत 1960 ई. में हुई थी।
  • चम्बल परियोजना के अंतर्गत सिंचाई हेतु पानी इसी बाँध से उपलब्ध करवाया जाता है।

2.  द्वितीय चरण

  • इस चरण के दौरान राणाप्रताप सागर बाँध का निर्माण किया गया है।
  • यह बाँध चित्तौड़गढ़ जिले में रावतभाटा के निकट स्थित है, जिसकी क्षमता 172 मेगावाॅट है।

3. तृतीय चरण

  • इस चरण के दौरान जवाहर सागर एवं कोटा बाँध का निर्माण किया गया है।

चम्बल घाटी परियोजना अंतर्गत निर्माण कार्य

1.  गाँधी सागर बाँध – 

  • मध्यप्रदेश में स्थित इस बाँध से 2 नहरें निकाली गई हैं।
  • बायीं ओर स्थित नहर बूँदी जिले तक जाकर अरावली पर्वत श्रेणियों के साथ-साथ बहती हुई “मेजा नदी’ में मिल जाती है।
  • दायीं ओर की नहर राजस्थान में प्रवेश करते हुए “पार्वती नदी’ को पार करते हुए मध्यप्रदेश में प्रवेश कर जाती है।
  • इसमें मध्यप्रदेश व राजस्थान की हिस्सेदारी 50-50% की है।
READ MORE about  राजस्थान का सामान्य परिचय || Rajasthan ka samany parichay

2.  राणाप्रताप सागर बाँध

  • राणाप्रताप सागर बाँध चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में स्थित है, जिसे 1970 में देश को समर्पित किया गया।
  • इसके नजदीक ही चम्बल नदी पर “चूलिया जल प्रपात’ स्थित है।

3.  कोटा बाँध/जवाहर सागर बाँध – 

  • यह राणाप्रताप सागर बाँध से 33 किमी. दूर स्थित है।
  • यह एक पिक-अप बाँध है।
  • यह बाँध 600 मी. लम्बा व  36 मी. ऊँचा है।
  • इसके बायीं ओर से निकाली गई नहर राजस्थान में सिंचाई के लिए काम आती है।
  • इस बाँध से निकाली गई नहर से राज्य के कोटा, बूँदी, टोंक, करौली व सवाई माधोपुर जिलों में सिंचाई की जाती है।

C. व्यास परियोजना 

  • यह परियोजना सतलज, रावी व व्यास नदियों के जल का उपयोग करने के लिए पंजाब, हरियाणा व राजस्थान द्वारा संयुक्त रूप से प्रारम्भ की गई है।
  • इसमें व्यास नदी पर हिमाचल प्रदेश में 2 बाँध बनाये गए हैं।

1.  पंडोह बाँध – 

  • यह बाँध हिमाचल प्रदेश के “मण्डी’ कस्बे के निकट स्थित है।
  • इस बाँध से व्यास-सतलज लिंक नहर निकालकर हिमाचल प्रदेश के “देहर’ स्थान पर 990 मेगावॉट का विद्युत गृह स्थापित किया गया है।
  • पंडोह बाँध से निकाली गई “सुन्दर नगर हाइडल चैनल’ पर एक जल-विद्युत गृह स्थापित किया गया है।

2.  पोंग बाँध

  • यह बाँध हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के ‘पोंग’ नामक स्थान पर निर्मित किया गया है।
  • राजस्थान को रावी-व्यास नदियों के जल के वितरण में अपने हिस्से का सर्वाधिक जल इसी बाँध से प्राप्त होता है।
  • पोंग बांध का प्रमुख उद्देश्य इन्दिरा गाँधी नहर परियोजना को शीतकाल में जल की आपूर्ति बनाये रखना है।

व्याससतलज लिंक परियोजना

  • यह लिंक नहर पंडोह बाँध (हिमाचल प्रदेश) से निकाली गई है।
  • इस लिंक नहर के निर्माण का उद्देश्य भाखड़ा और नाँगल बाँध में पानी की आपूर्ति को बनाये रखना एवं व्यास नदी के अतिरिक्त जल को प्रयुक्त करना है।
  • रावी-व्यास नदी से सम्बन्धित जल-विवाद को हल करने के लिए 1986 में राजीव-लोंगोवाल समझौते के तहत् गठित इराडी कमीशन द्वारा राजस्थान के लिए अतिरिक्त पानी का हिस्सा निर्धारित किया गया था।

D. माही बजाज सागर परियोजना

  • यह बहुउद्देश्यीय परियोजना राजस्थान व गुजरात की संयुक्त परियोजना है, जिसके लिए 1966 में समझौता हुआ था।
  • इस परियोजना के तहत् बाँसवाड़ा शहर के निकट “बोरखेड़ा’ गाँव में माही नदी पर माही बजाज सागर बाँध तथा गुजरात में कड़ाना बाँध बनाया गया है।
  • इस समझौते के तहत् नर्मदा परियोजना के पूर्ण हो जाने पर राजस्थान को भी कड़ाना बाँध से जल उपलब्ध हो सकेगा।
  • इस परियोजना पर 140 मेगावॉट का जल-विद्युत गृह स्थापित किया गया है।
  • इस परियोजना की समस्त विद्युत, राजस्थान को ही प्राप्त होती है, जिससे डूँगरपुर व बाँसवाड़ा जिलों के जनजाति क्षेत्रों में सिंचाई उपलब्ध हुई है।
  • इस परियोजना के अंतर्गत 3 चरण शामिल हैं –
READ MORE about  राजस्थान में पर्यटन Rajasthan me parytan

1.  प्रथम चरण – 

  • इसके अंतर्गत सर्वप्रथम 1983 ई. में माही बजाज सागर बाँध का निर्माण पूर्ण किया गया है।
  • इसमें राजस्थान व गुजरात सरकार द्वारा लागत राशि 45 : 55 के अनुपात में वहन की गई है।

2.  द्वितीय चरण – 

  • इसके अंतर्गत मुख्य बाँध से नीचे कागदी पिकअप बनाया गया है। इस बाँध से बायीं व दायीं मुख्य नहर निकाली गई है।
  • दायीं मुख्य नहर पर 2 लघु विद्युत गृह “घाटोल’ व “गानोड़ा’ स्थापित किये गए हैं।

3.  तृतीय चरण – 

  • इसके अंतर्गत मुख्य बाँध पर 50 मेगावॉट व 90 मेगावॉट के दो विद्युत गृह स्थापित किये गए हैं।
  • इस परियोजना का सर्वाधिक लाभ बाँसवाड़ा जिले को प्राप्त होता है।
  • इस परियोजना का नामकरण प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी व राष्ट्रीय नेता ‘जमनालाल बजाज’ के नाम पर किया गया है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

  • पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने बहुद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को “आधुनिक भारत के मंदिर’ की संज्ञा दी हैं।
  • सरदार सरोवर बाँध (नर्मदा परियोजना) :- यह राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश की संयुक्त परियोजना है। इस बाँध से मध्यप्रदेश (57%), महाराष्ट्र को (27%) व गुजरात को 16% बिजली मिलेगी। यह राजस्थान की पहली परियोजना है जिसमें सिंचाई केवल फव्वारा पद्धति से करने का प्रावधान है। इस परियोजना से राजस्थान के जालौर व बाड़मेर जिले के 2.46 लाख हैक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
  • नर्मदा जल में राजस्थान का हिस्सा :- 0.50 MAF
  • चूलिया जलप्रपात चम्बल नदी पर निर्मित है।
  • भारत का सबसे ऊँचा बाँध :- भाखड़ा-नागल बाँध। (226 मीटर ऊँचा)
  • माही बजाज सागर परियोजना राजस्थान (45%) एवं गुजरात (55%) की संयुक्त परियोजना हैं।
  • भाखड़ा नांगल परियोजना :- राजस्थान, पंजाब, हरियाणा की संयुक्त परियोजना। राजस्थान का हिस्सा :- 15.2%
  • भाखड़ा बाँध होशियारपुर जिले में सतलज नदी पर निर्मित। 1963 में राष्ट्र को समर्पित।
  • व्यास परियोजना :- पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान की संयुक्त परियोजना। पोंग बाँध अथवा रणजीत सागर बाँध व्यास नदी पर निर्मित है। राजस्थान का हिस्सा :- 0.86 MAF ध्यातव्य है कि 1986 में गठित इराडी कमीशन का सम्बन्ध रावी-व्यास जल विवाद निराकरण से है।
  • चम्बल राजस्थान व मध्य प्रदेश की संयुक्त नदी परियोजना है।
  • सिन्धु नदी जल सन्धि :- 19 सितम्बर, 1960

Leave a Comment

You cannot copy content of this page