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महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय (1710 – 1734 ई.) Maharana Sangram Singh Dvitiy

महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय (1710 – 1734 ई.)

Maharana Sangram Singh Dvitiy

  • –  राजस्थान में पहली बार महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय के समय मेवाड़ में मराठों ने प्रवेश किया तथा मेवाड़ से चौथ कर प्राप्त किया।
  • –  इन्होंने मराठों के विरुद्ध राजस्थान के सवाई जयसिंह के साथ मिलकर हुरड़ा सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई। लेकिन दुर्भाग्यवश इस सम्मेलन के आयोजित होने से पूर्व ही इनका देहान्त हो गया।
  • –  संग्राम सिंह द्वितीय ने दुर्गादास राठौड़ को विजयपुर की जागीर दी। इसके समय रामपुरा की जागीर पुन: मेवाड़ को प्राप्त हुई। इसने ईडर को भी मेवाड़ में मिला लिया था।
  • –  संग्राम सिंह के शासनकाल में मुगल बादशाह फर्रूखसियर ने जजिया कर हटाने का फरमान जारी किया।
  • –  इन्होंने उदयपुर के महलों में चीनी चित्रशाला का निर्माण करवाया।
  • –  इनके समय मेवाड़ चित्रशैली में कलीला दमना कथा का चित्रण हुआ।
  • –  इन्होंने मेवाड़ में स्थित जगदीश मंदिर का पुनर्निर्माण भी करवाया। इन्होंने फतेहसागर झील के किनारे सहेलियों की बाड़ी बनवाई तथा सीसरमा गाँव में वैद्यनाथ का मंदिर व वैद्यनाथ प्रशस्ति का निर्माण करवाया। इस प्रशस्ति के लेखक रूपभट्ट थे। इस प्रशस्ति से बांदनवाड़ा युद्ध की जानकारी मिलती है।
  • –  कर्नल जेम्स टॉड के अनुसार, बप्पा रावल की गद्दी का गौरव बनाये रखने वाला यह अंतिम राजा था।

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